सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान व राष्ट्रीय बंधुआ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष स्वामी अग्निवेश ने उत्तराखंड के मुख्य मंत्री भुवन चंद्र खंडूरी को पत्र लिख कर अनुरोध किया है कि वे बागेश्वर जिले के सौंग क्षेत्र में बनाई जा रही जलविद्युत परियोजना को जनहित में तत्काल निरस्त करें। पत्र की प्रतियाँ केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री सैफुदीन सोज तथा केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री सुशील कुमार शिंदे को भी भेजी गई।
आर्य समाज के एक कार्यक्रम में बागेश्वर आये हुए स्वामी अग्निवेश ने ‘सरयू बचाओ हक हकूक बचाओ संघर्ष समिति’ के निमंत्रण पर बागेश्वर बार एसोसियेशन के अध्यक्ष गोविन्द सिंह भंडारी, पी.यू.सी.एल. के नन्दा बल्लभ भट्ट, बंधुआ मुक्ति मोर्चा के अमीनुर्रहमान आदि के साथ कपकोट क्षेत्र का दौरा किया। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि उत्तर भारत हाइड्रो पावर कार्पोरेशन प्राइवेट लिमिटेड द्वारा उनके क्षेत्र में बनाई जाने वाली जल विद्युत परियोजना से उनके गाँवों को खतरा है। यह क्षेत्र अति संवदेनशील व भूकम्पीय जोन में है। समय-समय पर हुए भूस्खलनों से क्षेत्र में जानमाल की व्यापक तबाही हुई है। इस परियोजना को शुरू करने से पूर्व न तो प्रभावित गाँवों की जनता से अनापत्ति ली गई और न ही वन व सम्बद्ध मंत्रालयों से अनुमति प्राप्त की गई।
स्वामी अग्निवेश द्वारा शुरू की गई इस मुहिम से ग्रामीण उत्साहित हैं। ‘सरयू बचाओ हक हकूक बचाओ संघर्ष समिति’ के अध्यक्ष मोहन सिंह टाकुली के अनुसार स्वामी जी की मुख्यमंत्री से फोन पर भी बातचीत हुई है। उन्होंने देहरादून लौट कर इस सम्बन्ध में कार्यवाही करने का आश्वासन स्वामी अग्निवेश को दिया है। टाकुली ने यह भी बताया कि शीघ्र ही स्वामी जी की अगुवाई में एक शिष्टमंडल उक्त परियोजना के संदर्भ में प्रधान मंत्री से मिलेगा।
फिलहाल मल्ला दानपुर के सौंग में ग्रामीणों का आमरण अनशन जारी है। पुलिस प्रशासन जब तब अनशनकारियों को उठा अस्पताल भर्ती कर देता है और अनशनकारी अस्पताल से छूटने के बाद आंदोलन में शरीक हो जाते हैं। कड़ाके की ठंड व बर्फवारी के बीच सौंग में आंदोलन स्थल पर जली ‘धूणी’ की आँच तेज होती जा रही है। ग्रामीणों द्वारा फरवरी अंतिम सप्ताह में सौंग से बागेश्वर तक पदयात्रा कर जन जागरण करने का निर्णय लिया गया है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उन्हें परिवार के साथ गाँव बचाना है और गाँव के साथ देश बचाना है। यह एकता दूर तक बनेगी। लोगों को बतायेगी कि इस देश में बागेश्वर जिले के दानपुर घाटी में भी लोग रहते हैं, जो संघर्ष के लिये जीते और संघर्ष के लिये मरते हैं। ग्रामीणों के दबाव से फिलहाल परियोजना का निर्माण कार्य बंद हैं, लेकिन आंदोलन को तोड़ने के षड़यंत्र खूब रचे जा रहे हैं।


























आपकी टिप्पणीयाँ