किसी जमाने में जब भी होली आने को होती, हम हुक्काराम जी की चौपाल में होते। वहाँ खड़ी होली, बैठ होली, लकड़ी की सींक सहित आलू के गुटके की बातें होती। तभी होलियार स्वाँग के कलाकारों की एक टीम बनती। चुने हुए लोगों की उनकी इन्तजामी व्यवस्था, चाहे वह शादी ब्याह की हो या किसी सामाजिक कार्यक्रम की, कलाकारों की प्रस्तावित स्वाँग रचनाओं को ऐडिट करने का मजा ही कुछ और होता। कोई उसे मोनो के रूप में पेश करता तो कोई हास्य के रूप में।
इस बार हुक्काराम जी उखड़े हुए थे। उनके पास बाहर के एक पुराने शौकिया होलियार मस्तलाल हमसे पहले ही बतिया रहे थे।…..हमने स्वाँग पर चर्चा करनी चाही तो हुक्काराम जी उखड़ गये। वैसे लग रहा था कि वे पहले से ही उखड़े हुए थे। बोले, ‘‘इस चुनाव व्यवस्था में स्वाँग कला राजनैतिक दलों द्वारा अपहृत कर ली गयी है। होलियारों की होलियाँ पटाङण से मंचों तक चली गई है। देखो क्या शानदार एडिट हुआ है स्वाँग का ? उस नेता ने हमको उदाहरण दे मारा। अब तक हनुमान को पहाड़ चढ़ाते रहे। अब की हाथी को चढ़ाओ। …… दलित कल्याण पारटी ने महापण्डित सम्मेलन का स्वाँग कर लाखोंलाख वोटरों को ऐसा उचकाया कि बेचारा होलियार देखता रह गया। यह होलियार भी चन्दा माँगा करता था आलू के गुटके और भाँग के गोजे के लिए। लेकिन इनका स्वाँग देखो, बिना काम के एम. बी. में नपत जैसा कुछ कर देने लाख-करोड़ का चन्दा बना जा रहा था। लेकिन नानुकुर में इंजीनियर को सीधे यमलोक पहुँचा दिया बिना यजमान के। डाइरेक्ट वाया स्वाँग। बड़ी-बड़ी परियोजनाओं की कम्पनियाँ आ रही हैं। पता नहीं कितने इंजीनियर इन दैत्याकार प्रोजक्टों के आत्मघाती एम.बी. के स्वांग का शिकार होते हैं।’’
अब मस्तलाल जी की बारी थी।
‘‘हमारे मंत्री जी भी स्वाँग करने वाले बाहुबली दादा जैसे हो गये हैं। पुलिस वालों को मजा चखाने के लिये वे होलियार बन गये। और पुलिस में गिरफ्तार अपने बाहुबली दोस्तों को जेल से खींच कर अपनी जनता के बीच में ले आये। और जन सेवा के स्वाँग का पक्का ऐलान कर दिया। उनके दूसरे सहयोगी भी ऐसा ही स्वाँग कर रहे हैं। मंत्रीगण वृद्धावस्था की चार सौ रुपल्ली की पेंशन के लिए जनता दरबार लगा रहे हैं। माननीय मंत्री जी पटवारी और ग्रामसेवक बनने का स्वाँग रचने में माहिर होते जा रहे हैं। सूखे, वर्षा पर कोई बात नहीं….। यह गैर निस्तारित मामला है। विधवा पेंशन करेंगे मौके पर निस्तारित।’’
‘‘स्वाँग एक्सपर्ट देखिये- विकास का प्रोपोगण्डा विकास के स्वाँगी तेवर. ….बेरोजगारी दूर हो रही है…..पलायन रुक गया। माननीय बड़े स्वामी मसीहा का स्वाँग से मुस्कुराता हुआ चेहरा देखिये…..दिल्ली, बम्बई के पूँजीपतियों से बतिया रहे हैं। प्रदेश को हैलीकॉप्टर के स्वाँग में उड़ा रहे हैं। अनपढ़ों को शिक्षित करने के लिए स्कूल पर स्कूल खोले जा रहे हैं ताकि सूखे और अवर्षा को समझ सकें। मसीहा के विकास परख सकें।’’
फिर हुक्काराम जी को जैसे कुछ याद आया।
‘‘हमारे विपक्षियों के स्वाँग रचने का तरीका कुछ अलग है। या तो वे हाई कमान से टिकटविहीन कर प्रताड़ित कर दिये जाते हैं। वे स्वामी होलियार हो जा रहे हैं। ठान लेते हैं कि फलाँ फलाँ कैसे चुनाव जीतता है। वे गुजिया फैला देंगे. …..अबीर गुलाल लगा लेंगे। ऐसे होलियारों की एक टीम अलग बन जाती है। वे अलग-अलग जगह से उत्पीड़ित होते हैं। उन्हें पता नहीं रहता कि कितनी सीटों पर चुनाव होना है। लेकिन चुनाव लड़ाका सूची में दस गुना वृद्धि हो जाती है। वे सब सीटों पर चुनाव लड़ने का स्वाँग कर देते हैं।
‘‘दमदार विपक्षी अलग तरह का स्वाँग करते हैं। आंदोलन दर आंदोलन का स्वाँग रचते हैं। हत्या हो गई….दहेज हत्या हो गई। शहर को आन्दोलनमय बनाने का स्वाँग रचो। अतिक्रमण से सड़क संकरी हो गयी है, हादसा हो गया है……कोई बात नहीं। अतिक्रमणकारियो हम तुम्हारे साथ हैं आन्दोलन करो। सड़क को संकरा करो। सरकार दोषी है। उसने आकाश में सड़क डालने का अभी तक कोई प्रोजेक्ट नहीं बनाया। इस सरकार को उखाड़ फेंको।
‘‘स्वाँग करो। हमें मौका दें। अगली बार सत्ता में आपके साथ स्वाँग करेंगे।’’
फोटो : हिलजात्रा साभार मेरा पहाड़

























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