वह अविस्मरणीय देश / लेखक: ताराचन्द्र त्रिपाठी /
प्रकाशक: ज्ञानोदय प्रकाशन, नैनीताल / पृ. सं.: 160।
मूल्य 350रु.,
नयनाभिराम, कलात्मक एवं ज्ञानवर्द्धक 116 रंगीन तथा श्वेतश्याम चित्रों से अलंकृत प्रस्तुत ग्रन्थ यों तो एक पर्यटक की डायरी जैसा लगता है, किन्तु लेखक की पैनी दृष्टि उसमें बहुत सारे रूप जीवन्त रूप में उभार देती है। केवल 89 दिनों की यात्रा में ही लेखक ने एक समूचे राष्ट्र और उसके निवासियों के लोकजीवन को कुशलता के साथ समेट लिया है। उदाहरणार्थ, विदेशी व्यक्तियों के जापानियों के व्यवहार के संबंध में कहा गया है कि- ‘‘जापानियों का शालीन व्यवहार पर्यटक को यह अहसास होने ही नहीं देता कि वह उस देश में अनपेक्षित है।’’ किसी अपरिचित के द्वारा किसी अपरिचित स्थान के बारे जिज्ञासा किये जाने पर न केवल उसका दिशा निर्देश कर देना, अपितु उसे उसके गन्तव्य स्थान पर पहुँचा देना, किसी काम को अनावश्यक रूप से न लटकाना, बसों, ट्रेनों एवं भीड़-भाड़ वाले स्थानों पर पूरे नागरिक नियमों एवं अनुशासन का पालन करना, सर्वत्र एवं सभी प्रकार के कार्य व्यवहारेां में शालीनता का बर्ताव करना आदि ऐसे गुण हैं जो जापानियों के रक्त एवं आचरण में गहराई के साथ समाये हुए हैं।
लेखक बताते हैं कि ‘‘जापानी श्रमिक अपने आप को व्यक्ति नहीं, समूह का अंग मानता है। लोग अपने व्यक्तिगत हितों की अपेक्षा सामूहिक हित को अधिक महत्व देते हैं।’’ इनकी प्रगति एवं आर्थिक विकास के रहस्यों का उद्घाटन करते हुए बताया गया है कि इनके मूल में निहित हैं- इनका दृढ़ संकल्प, कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन। लेकिन फिर मोहभंग, ‘‘जब मैं इस स्वप्नलोक से वापस लौटा तो मैंने पाया कि मैं फिर से स्वार्थ और सत्ता के लिए देश और समाज को खंड.खंड कर सब कुछ नीलाम कर देने से भी न चूकने वाले अनाचारी, भ्रष्ट नेतृत्व, घोंघे की तरह घिसटती न्याय व्यवस्था, अकर्मण्य तंत्र, बाहुबल, धनबल, जाति और संप्रदाय की महामारी से ग्रस्त लोगों के बीच खड़ा हूँ। न मेरी अपनी कोई भाषा है न परंपरा। मैं दूसरों की ताल पर नाचने वाले, दूसरों की इयत्ता को ही सब कुछ समझने वाले, बाहर से स्वतंत्र पर भीतर से दासता से लबालब रीढ़विहीन पुतलों की भीड़ में कहीं खो गया हूँ।’’
पुस्तक जापानी लोकजीवन के रूपों का साक्षात्कार कराने एवं उनके अनुकरणीय सद्गुणों को अपनाने के लिए अपने देश के लोगों को प्रेरित करने की दृष्टि से स्वागत एवं प्रचार-प्रसार के योग्य है।
प्रस्तुति : डी.डी.शर्मा