आई कैसी बाढ़ लहर के दाँत हुए पैने
शहर में मगरमच्छ तैरे।
बड़े बाँध से छोड़ा पानी बाढ़ हुई दूनी
पर्वत और मैदानी साँसें आज हुई सूनी
उत्तर तो गुम है प्रश्नों के पाँव हुए गहरे
शहर में मगरमच्छ तैरे।
मौसम में परिवर्तन आया टूट गये तटबन्ध
उधड़ी हुई योजनाओं के टूटे फूटे छंद
नारे तो चुप हैं वादों के टूटे हैं पहरे
शहर में मगरमच्छ तैरे।
सीढ़ीदार खेत आज मैदानों में बदले
केन्द्र और प्रान्त दोनों के उतर गये चेहरे
कुछ लोगों की चींखे गूँजी कुछ लोग हुए बहरे
शहर में मगरमच्छ तैरे।
- डॉ. अतुल शर्मा