हम तिब्बती समुदाय के लोग पिछले कुछ दिनों से मीडिया में हमारे बारे में छप रहे निराधार समाचारों से अत्यन्त आहत हैं। अपनी मातृभूमि छोड़ने को विवश होने के बाद सन् 1959 में तत्कालीन नेहरू सरकार ने अत्यन्त उदारतापूर्वक हमें इस महान देश में शरण दी और हमारे जान-माल के लिये सुरक्षा उपलब्ध करवायी। हम भारत सरकार की इस उदारता को अत्यन्त कृतज्ञतापूर्वक याद करते हैं और अपनी ओर से पिछले 52 साल से यह प्रयास करते रहे हैं कि हम भारतवासियों के दुःख-सुख में कंधे से कंधा मिला कर खड़े रहें। वर्ष 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ, वर्ष 1971 में बांग्ला देश में और 1998 में कारगिल में हुई लड़ाइयों में हमारे नौजवानों ने भारत की सीमाओं की रक्षा के लिये अपने प्राण तक न्यौछावर किये।
लेकिन हाल के दिनों में हमारे समुदाय को अनावश्यक रूप से बदनाम करने की एक मुहिम सी छिड़ी हुई है। ऐसा माहौल बना दिया गया है, मानो हम भारतीय कानूनों को कतई नहीं मानते और भारतीय हितों के खिलाफ काम करते हैं, यहाँ तक भारत के शत्रु देशों के लिये जासूसी तक करते हैं। हम कतई यह नहीं मानते कि करमापा उग्येन ठिल्ले दोरजे चीनी जासूस हो सकते हैं। यह हमारा विश्वास है। विभिन्न देशों से आने वाले श्रद्धालु उन्हें अपनी-अपनी करेंसी में भेंट देते हैं। अतः उनके पास प्राप्त विदेशी धन का गलत होने का प्रश्न नहीं होता। हो सकता है कि किसी गलतफहमी से यह स्थिति पैदा हो रही हो।
जहाँ तक तिब्बतियों द्वारा व्यापार करने, अचल सम्पत्ति खरीदने अथवा राशन कार्ड बनवाने जैसे आरोप हैं, इनके बारे में हम स्पष्ट रूप से कहना चाहते हैं कि यह सब हमने भारत के कानूनों के अन्तर्गत किया है। धर्मशाला तथा देहरादून जैसे नगरों में, जहाँ तिब्बतियों की खासी संख्या है, तिब्बतियों को राशन की दुकानें तथा गैस सप्लाई की एजेंसियाँ तक उपलब्ध करवायी गई हैं। व्यापार करने के लिये हमें गृह मंत्रालय के पुनर्वास प्रभाग से विधिवत् अनुमति दी गई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने अनुमति दी है कि भारत में पंजीकृत तिब्बती यदि चाहें तो यहाँ अचल सम्पत्ति खरीद सकते हैं। दिसम्बर 2010 में दिये गये दिल्ली उच्च न्यायालय के एक निर्णय के अनुसार वर्ष 1950 से 1986 के बीच भारत में पैदा हुए तिब्बती भारतीय पासपोर्ट रखने के लिये अधिकृत घोषित किये गये हैं।
हम भारत के लोगों, विशेषकर नैनीताल के नागरिकों, जिनके साथ हमने पिछले 52 साल अत्यन्त सुखपूर्वक बिताये हैं, से निवेदन करते हैं कि हम पर विश्वास करें तथा अपना स्नेह हम पर पूर्ववत् बनाये रखें।
पेमा गेकिल सिथर, अध्यक्ष, तिब्बती शरणार्थी फाउण्डेशन, नैनीताल