ये कैसी राजधानी है ? ये कैसी राजधानी है ?
हवा में ज़हर घुलता है, औ’ जहरीला सा पानी है
ये कैसी राजधानी है….
शरीफों की कहानी को यहाँ कोई नहीं सुनता
यहाँ सब की जुबानों पर दबंगों की कहानी है।
ये कैसी राजधानी है….
अगर जीना है तो सुन लो यहाँ झुकना जरूरी है
सत्ता की ये चौखट है जो चमचों की दिवानी है
ये कैसी राजधानी है…
कहाँ तो सांझ होते ही शहर में नींद सोती थी
कहाँ अब ‘शाम’ होती है, ये कहना बेइमानी है
ये कैसी राजधानी है….
शहर में पेड़ लीची के बहुत सहमे हुए से हैं
सुना है एक बिल्डर को नई दुनिया बसानी है।
- चन्दन सिंह नेगी
