सरकारी खातों में अधिकारियों की मनमानी से किसकी भूमि किसके नाम की जाती है, इसका एक उदाहरण हाल में जोशीमठ के रैगाँव, अब रविग्राम में मिला। इस गाँव की 21.119 हेक्टेयर या लगभग 211 नाली भूमि उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग ने 1970 के दशक में विष्णुप्रयाग जल विद्युत परियोजना के लिए वहाँ के किसानों से अधिग्रहीत की थी। सिंचाई विभाग उस परियोजना को नहीं चला सका और उसने परियोजना, समस्त अधिग्रहीत भूमि सहित एक निजी कंपनी, जे. पी. इंडस्ट्रीज को बेच दी। इस कंपनी ने उस भूमि पर अलकनंदा नदी से पानी लानेवाली सुरंग के अंदर लगने वाले लोहे की चद्दरों के अस्तर बनाने का कारखाना स्थापित कर दिया। पिछले वर्ष इस कारखाने का काम समाप्त होने पर उसे उठाए जाने की बात हुई। सवाल उठा कि उस भूमि का क्या किया जाये ? जोशीमठ के विधायक सहित कुछ लोगों का सुझाव था कि उस पर इस शहर के लिए एक हेलीपैड, एक स्टेडियम, एक ऑडिटरियम तथा न्यायालय बनाया जाये। विधायक केदार सिंह फोनिया के अनुसार तब के मुख्यमंत्री भुवन चन्द्र खंडूरी ने इन कार्यों के निर्माण की स्वीकृति दे दी थी। जिलाधिकारी चमोली ने अपने पत्र संख्या 7550, दिनांक 23 सितंबर 2008, को शासन से अनुरोध किया कि जयप्रकाश इंडस्ट्रीज द्वारा विष्णुप्रयाग जल विद्युत के लिए दी गई जो भूमि शासन को वापिस की गई है वह उपरोक्त भवन एवं हेलीपैड के निर्माण के लिए दे दी जाये।
जिलाधिकारी के प्रस्ताव के विपरीत शासन द्वारा पत्र संख्या 307, दिनांक 4 फरवरी 2009, को यह सारी भूमि, कुछ अन्य भूमि के साथ ऊर्जा विभाग को हस्तांतरित की गई। यह कार्य तब के मुख्यमंत्री के सचिव सारंगी द्वारा किया गया। इसका एक अर्थ था कि ऊर्जा विभाग उसे किसी सरकारी-निजी कंपनी को उसके काम के लिए सौंप दे। निजी कंपनियाँ इस तरह की अच्छी भूमि पाने के लिए बड़ी रकम की रिश्वत देने तैयार रहती हैं। सही तो यह होता कि यह भूमि उन ग्रामवासियों को वापस की जाती, जिनसे ली गई थी। उनका पहला हक बनता था। उनके हक की अनदेखी कर यह ऊर्जा विभाग को दे दी गई, जो नियमों के विरुद्ध है। गाँववालों की भूमि, जिस पर उनका जीवन आश्रित होता है, का इस प्रकार अधिकारियों के द्वारा मनमानी से दिया जाना अवैध होना चाहिए। नये मुख्यमंत्री निशंक से कहा गया है कि इस भूमि पर जिलाधिकारी द्वारा प्रस्तावित स्टेडियम, ऑडिटरियम तथा न्यायालय बनने चाहिए।
अब देखना है कि मुख्यमंत्री उस भूमि का क्या करते हैं ?

























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