हम पर किये गये
जुल्मों का प्रतीक है
प्रताप
मारा गया पुलिस की गोली से
3 अक्टूबर उन्नीस सौ चौरानब्बे
हर साल 2 मिनट का
मौन रख कर
अपनी श्रद्धांजलि प्रकट
करते आ रहे हैं
हम तब से।
जो भी श्रद्धांजली देते हैं हम आज
दुश्मन के खिलाफ
अपने भीतर के गुस्से में
हम जोड़ रहे होते हैं ब्याज
भावनाओं का कोई खाखा
और प्रतीक का
कोई चेहरा नहीं होता
पर हम बनवा रहे हैं मूर्ति
उसी पुलिस के मालिक से
जहाँ पर कत्ल हुआ उसी जगह
बाकायदा अनुरोध करके
ये सब करके
हमने आत्महत्या कर ली है
पूछ रहा हूं मैं अपने आप से
ये कैसी श्रद्धांजलि है।
- दिनेश उपाध्याय

























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