3 responses to “इस तरह भटकती है पत्रकारिता !”

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    patrakarita main bhi rajneeti havi ho gayi hai press club ke pado par jugaru log kabij hain jo achche wo imandar logon ko aage nahi aane dena chate hain aaise main patrakarita ki durgati to honi hai.kewal naye patrakar he galat hain ye soch sahi nahi hai .balki kuch purane patrakar bhi aise hain jinka aham patrakarita ki jaron main maththa dalne ka kam kar raha hai .
    dinesh tiwari
    khatima

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    बिल्कुल सही कहना है आपका . आज पत्रकारिता मात्र रौब दिखाने और पैसा बनाने का साधन बन गई है ,अपने नेता को खुश करने का साधन बन गई है ,ताकि विधायक निधि बन सके . उदाहरण के लिये जैँती अल्मोडा के पत्रकारोँ को ले लीजिये यहाँ की राजनैतिक गतिविधियोँ की जानकारी एक अखबार मेँ होती है तो दूसरे मेँ नही। विधायक के मन की लिखो तो वाह वाही नही तो सार्वजनिक मँच से पत्रकार को कोसते हैँ

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      आप बिलकुल सही फरमा रहे हैं कुछ लोगों को तो पत्रकारिता की समझ भी नहीं होती है, केवल रोब झाड़ने की लिए पत्रकार की पट्टी लगा लेते हैं।

      आनन्‍द सिंह राणा,
      मसूरी

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