मल्लादानपुर व बिचला दानपुर क्षेत्र में बरसात से रड़ने-बगने की दिक्कतों के साथ ही तमाम सड़कें बाधित हैं। क्षेत्रवासी स्वास्थ्य चिकित्सा, बिजली, पानी आदि की समस्याओं से त्रस्त हैं लेकिन यहाँ की सुध लेने वाला कोई नहीं है। स्थानीय मीडिया भी इन दूरस्थ व पिछड़े इलाकों की सुध नहीं लेता। रिखाड़ी, हड़कोट, धुरकोट, मुनार, सूपी, तलाई, लाहुर, मिकिला, झूनी, खलझूनी, गांसी आदि गाँवों का विगत डेड़ माह से सम्पर्क टूट गया है। खाद्यान्न व मिट्टीतेल की समस्या उत्पन्न हो गई है। बारिश से जगह-जगह सड़कों में मलवा भर जाने व ध्वस्त हो जाने से मार्ग पैदल चलने लायक भी नहीं रहे। सूड़िंग-सौंग-खालीधार मोटर मार्ग सौंग के समीप पुल ध्वस्त हो जाने से अवरुद्ध हो गया है। सूड़िंग गाँव के बीचों-बीच बह रहा नाला (मनरी गधेरा) दोनों तरफ भूमि कटाव कर उपजाऊ कृषि भूमि को भारी क्षति पहुँचा रहा है। मलवा-पत्थर खेतों में भरता जा रहा है। इस नाले से मकानों को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। सौंग क्षेत्र में जल निगम की पेयजल योजना ध्वस्त हुए आठ माह से अधिक हो गये हैं। पाइप लाईन भी बह गई है। युवा सामाजिक कार्यकर्ता राजेन्द्र सिंह टाकुली का कहना है, लोग दूषित जल पीने को मजबूर हैं। इससे पीलिया की शिकायतें बढ़ गई हैं।
तप्तकुण्ड में गत वर्ष सौंदर्यीकरण के लिए बनी चारदीवारी नदी के कटाव से ध्वस्त हो गई। सुमगड़ में भूस्खलन से प्रताप सिंह धींगा और तुलसी देवी के मकान ध्वस्त हो गये लेकिन उनको मात्र पाँच-पाँच हजार रुपए की आर्थिक सहायता जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई। यहाँ भी पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हो चुकी है।
राजकीय इन्टर कॉलेज सौंग का भवन हल्की बरसात में ही टपकने लगता है और वर्षा होते ही बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। स्कूल में बैठने की व्यवस्था नहीं है। क्षमता से अधिक बच्चे कक्षा मे ठूँसे जाते हैं। विद्यालय को तीन कम्प्यूटर उपलब्ध हैं। कम्प्यूटर शिक्षा के लिए 9 से 12वीं कक्षा तक के छा़त्रों से प्रति छात्र रुपया 10 बतौर शुल्क लिया जाता है लेकिन बच्चों को कम्प्यूटर का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। भारत दूर संचार निगम का मोबाइल टावर चौड़ा व सूपी में लग जाने के बावजूद लोग 30-40 किमी. दूर से भराड़ी फोन करने जाते हैं। विद्युत व्यवस्था अक्सर बाधित रहती है।
विद्युत व्यवस्था की हालत बिचला दानपुर के शामा क्षेत्र की भी गड़बड़ है। कुछ गाँवों में लाइन बिछा दिये जाने के बावजूद कनेक्शन नहीं दिये गये हैं। नानी पन्याली वालों ने तो विद्य़ुत अव्यवस्था को देखते हुए कनेक्शन लिया ही नहीं। इन क्षेत्रों में कोई बड़ी आपदा आ जाये तो तत्काल सूचना देने की कोई व्यवस्था नहीं है। लोगों को करीब 25 किमी. दूर भराड़ी ही आना पड़ेगा।
बड़ी पन्याली, भनार, रमाड़ी, नामती चेटाबगड़, कनोली, खेती, माजखेत, लाथी, चुचेर, शामा, लीती-गोगीना, हमटी कापड़ी, रातिरकेठी, मल्खा ढूंगचा, कीमू आदि बिचला दानपुर की 18 ग्राम सभाएँ बिजली, पानी, सड़क, दूरसंचार आदि सुविधाओं से वंचित हैं। दूर संचार वालों का एक टावर भेड़ फार्म के निकट शो पीस की तरह खड़ा किया गया है। इस क्षेत्र में शामा में अशासकीय व माजखेत में राजकीय इन्टर कॉलेज तथा तीन हाई स्कूल-नामती चेटाबगड़, लीती तथा रातिरकेठी में हैं। चार जूनियर हाई स्कूल-रमाड़ी, भनार, शामा (लोहारकूड़ा में कन्या जू. हाई स्कूल) तथा विरुवानौला में हैं। प्राथमिक विद्यालय हर गाँव में हैं, लेकिन अध्यापकों की कमी, पठन-पाठन की सामग्री का अभाव, विद्युत व पेयजल आदि के अभाव से कमोबेश सभी विद्यालय त्रस्त हैं।
स्वास्थ्य-चिकित्सा की स्थिति सर्वत्र एक सी है। शामा में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है, पर चिकित्सक नहीं हैं। फार्मासिस्ट, वार्डबॉय व स्वास्थ्य परिचायिका के भरोसे चिकित्सालय चल रहा है। गोगीना व भनार में भी फार्मासिस्ट ही रोगियों का उपचार करते हैं। चेटाबगड़ में अभी किसी भी स्वास्थ्यकर्मी की नियुक्ति नहीं हुई है। गंभीर रोगियों को कपकोट-बागेश्वर ही जाना पड़ता है। सामाजिक कार्यकर्ता दरबान सिंह कोरंगा बताते हैं कि शामा-तेजम मोटर मार्ग 60 के दशक से अब तक बनने में ही है। जब वे छोटे थे वर्ष 1956-57 से यहाँ पर सड़क कटनी शुरू हो गई थी और 62 तक पूरी कट चुकी थी। पचास साल में करोड़ों रुपया खर्च हो गया होगा, यातायात चालू नहीं हो सका। इस सड़क के खुलने से इस क्षेत्र के लोग लाभान्वित तो होंगे ही बागेश्वर से तेजम-मुनस्यारी की ओर आने-जाने वालों को भी इस मार्ग से कम दूरी तय करनी पड़ेगी।
बागेश्वर- कपकोट- भराड़ी- शामा तथा भराड़ी-सौंग-लोहारखेत मार्ग की सड़कों में जगह-जगह गड्ढे बन जाने, भू स्खलन से वाहन चलाना दुष्कर हो गया है। इन सड़कों की नियमित देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं है।
शामा-बड़ी पन्याली-डांक्ती सड़क मार्ग विवादों में घिर जाने के कारण यह मामला न्यायालय में चला गया है। शामा से डांगती 9 कि.मी. दूर है। इस मार्ग के लिए यहाँ के ग्रामीणों ने चार-पाँच साल पूर्व डांक्ती में इन्हीं दिनों लम्बे समय तक आंदोलन किया और एक कि.मी. सड़क स्वीकृत भी करवाई। लेकिन निर्माण कार्य शुरू होने से पूर्व ही कुछ लोगों ने ऊपर से एक और सड़क का प्रस्ताव ला मामले को उलझा दिया। दोनों पक्षों में आरोप-प्रत्यारोप हुए और मामले की जाँच से पता चला कि पूर्व प्रस्तावित व एक कि.मी. स्वीकृत सड़क की सर्वे जिला परिषद मार्ग से ही हो रही थी और इस मार्ग में पेड़ भी कम कट रहे हैं जबकि ऊपर से प्रस्तावित मार्ग में पेड़ अधिक कट रहे थे। तत्कालीन जिलाधिकारी के इस क्षेत्र में आने के बावजूद मामले के न सुलझने पर पूर्व प्रस्तावित मार्ग समर्थकों ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर दी है।
खड़लेख-माजखेत 15 किमी. सड़क मार्ग 8 किमी. में ही सिमट कर रह गया है। यहाँ से 5 किमी. दूर भनार ग्रामसभा के तोक सम्हाल गाँव तक सड़क कट चुकी है। शामा- लीती- गोगीना मार्ग कापड़ी तक प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत स्वीकृत है पर अभी उसमें कार्य शुरू नहीं हुआ है। हरसिंयाबगड़-शामा मोटर मार्ग भी अभी अधर में लटका है।
जिला पंचायत अध्यक्ष रामसिंह कोरंगा बताते हैं, दो साल के भीतर सभी स्वीकृत सड़कें बन जायेंगी।