सावित्री सिंह/विनीत फुलारा
यू.पी. डिजिटल्स भवाली के छँटनीशुदा 27 कर्मचारियों का समायोजन न होने से उनके परिवारों के समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
यू.पी.डिजिटल्स भवाली (घोड़ाखाल) इकाई का शिलान्यास 8 मार्च 1977 को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री एन.डी.तिवारी द्वारा किया गया था (नैनीताल समाचार, 1 नवम्बर 1979)। इस इकाई द्वारा एच.एम.टी. की घड़ियों का निर्माण किया जाता था, जिसके लिये तब कच्चा माल एच.एम.टी. वाच यूनिट बैंगलूर से मंगाया जाता था। बाद में रानीबाग में एच.एम.टी. कारखाना लगने से वहीं से कच्चा माल आने लगा। प्रारम्भ में इस कम्पनी में काफी अच्छा उत्पादन हुआ। बाद में कम्पनी प्रबन्धन की लापरवाही एवं कच्चे माल की आपूर्ति समय पर न होने से उत्पादन प्रभावित होने लगा और कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़ गये। कर्मचारियों ने अपने प्रयास से इस कम्पनी को दुबारा चलाने की कोशिश की, लेकिन प्रबन्धन की लापरवाही की वजह से ये कोशिश नाकाम रही। कम्पनी के सुचारु न चलने की वजह से उत्तराखण्ड सरकार ने इस कम्पनी में स्वैच्छिक सेवा निवृत्ति लागू कर दी। अधिकांश कर्मचारियों ने इसका लाभ लिया। लेकिन 27 कर्मचारी अपनी पारिवारिक समस्याओं की वजह से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति नहीं ले पाये।
‘यू.पी.डिजिटल्स लि. भवाली’ तथा ‘मैसर्स ट्रांसकेवल लिमिटेड काठगोदाम’ कुमाऊँ मण्डल विकास निगम नैनीताल की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई थीं। इन्हें उत्तराखण्ड सरकार के शासनादेश संख्या 646 (छः)/2006-10(6) दिनांक 12.12.2006 एवं 707 (छः)/2006-262 (पर्यटन)/-3 दिनांक 12.12.2006 को शासन के दिनांक 20.08.2005 को लिये गये निर्णय के क्रम में मन्त्री मंडल की बैठक दिनांक 6.12.2006 के निर्णय के अनुसार 1 जनवरी 2007 से इन दोनों इकाइयों का परिसमापन किया जाना तय किया गया।
उत्तराखण्ड शासन के पत्र संख्या 685/6/2007-262 (पर्यटन) 2003 दिनांक 23 अगस्त 2007 एवं पत्र संख्या 874/6/2007-10 (6) 2006 दिनांक 31 अक्टूबर, 2007 द्वारा मैसर्स ट्रासंकेवल लि. काठगोदाम तथा मैसर्स यू.पी. डिजिटल्स भवाली को परिसमापन के फलस्वरूप शेष कर्मियों को छँटनीशुदा घोषित करने एवं इन को दी जाने वाली सुविधाओं के सम्बन्ध में शासनादेश जारी किये गये।
समान परिस्थितियों के होते हुए ट्रांसकेवल लि. काठगोदाम के शेष छँटनीशुदा कर्मियों का समायोजन पॉवर कारपोरेशन लि. में कर दिया गया, लेकिन यू.पी.डिजिटल्स लि. भवाली के छँटनीशुदा कर्मियों की उपेक्षा की गई।
इन कर्मियों द्वारा समय-समय पर शासन स्तर पर अपने समायोजन की गुहार लगाई गई। पूर्व में मुख्यमंत्री के जनपद भ्रमणों के दौरान इनके द्वारा कई बार उन्हें ज्ञापन भी दिये गये जिस पर कुमाऊँ मण्डल विकास निगम नैनीताल को उक्त कर्मियों को अन्यत्र विभागों में समायोजन हेतु निर्देशित किया गया था। किन्तु अभी तक इस दिशा में कोई कार्यवाही नहीं हुई। बेरोजगार कर दिये गये इन कर्मियों को अपने परिवार के भरण-पोषण के अलावा अन्य जरूरी खर्चों के लिए घोर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।