सरकार को मिलने वाले राजस्व की दुहाई दे-दे कर आबकारी विभाग गंगोलीहाट में शराब की दुकान खोलने को लेकर निरन्तर प्रयासरत है। विभाग के ये प्रयास तब से ही जारी हैं, जब से गंगोलीहाट में महिलाओं के नेतृत्व में 2006 में चले बड़े आंदोलन ने यहाँ शराब की दुकान को बन्द करवा दिया था। विभाग इस संदर्भ में कई बार यहाँ के जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर यहाँ शराब की दुकान खोले जाने को सहमत कराने के प्रयास कर चुका है। लेकिन जिस व्यापक आंदोलन के चलते यह शराबबन्दी लागू हुई थी, उसका असर यहाँ भी देखने को मिलता है कि जनप्रतिनिधि भी विभाग को दुकान न खोले जाने का करारा जवाब देते दिखे हैं। लेकिन इस बार गंगोलीहाट के व्यापार संघ ने शराब की दुकान खोले जाने को लेकर ज्ञापन, विभिन्न स्तरों पर प्रेषित किए हैं और सरकार को शराब की दुकान न खोलने
पर व्यापक आंदोलन और अनिश्चितकालीन बाजारबन्दी की धमकी दी है।
आबकारी विभाग द्वारा अब तक की गई मेहनत का ही नतीजा है कि व्यापार संघ को गंगोलीहाट की दर्जनों समस्याओं के इतर सिर्फ शराब की दुकान यहाँ न होना सबसे बड़ी समस्या लगने लगा है, जिसके लिए वह एक व्यापक आंदोलन की भी तैयारी कर रहा है। आबकारी विभाग ने जो पत्र पूर्व में यहाँ के जनप्रतिनिधियों को लिखे हैं, उसमें उसने गंगोलीहाट में शराब की तस्करी का बढ़ता नेटवर्क, संभ्रांत लोगों के तस्करी में शामिल होने, क्षेत्र के लोगों को अवैध रूप में घटिया व हानिकारक शराब की उपलब्धता आदि का हवाला दिया है। इसके साथ ही पत्र में सरकारी राजस्व में प्रति वर्ष हो रहे करोड़ों के नुकसान की दुहाई देकर भी शराब की दुकान खोले जाने के लिए सहमत कराने की कोशिश है। पत्र लिखने के अलावा भी आबकारी विभाग के कर्मचारीयों ने गंगोलीहाट बाजार में इन बातों को मौखिक रूप में प्रचारित किया है।
गंगोलीहाट में विगत वर्षों में शराबबन्दी के दौरान शराब की तस्करी का कारोबार खूब फला-फूला है। यह तस्करी का कारोबार आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत के बगैर संभव नहीं है। आबकारी विभाग की संलिप्तता तो तभी जाहिर हो गई थी, जब शराबबन्दी के कुछ ही महीनों बाद डूनी में महिलाओं द्वारा शराब का एक ट्रक पकड़ा गया। जैसा कि बाद में सूत्रों से पता चला कि यह ट्रक गंगोलीहाट की बन्द हो चुकी शराब की दुकान के लिए सरकारी गोदाम से लाया जा रहा था। रही बात पुलिस की, तो क्षेत्र के घोषित तस्करों के साथ पुलिस के मधुर सम्बन्धों की चर्चा पूरे
इलाके में है।
दरअसल गंगोलीहाट में आबकारी विभाग और प्रशासन के तस्करी रोकने में असफल रहने को गलत ढंग से प्रचारित कर यहाँ शराब की दुकान खोलने के प्रयास किये जा रहे हैं। आबकारी विभाग जिस तरह पत्र लिखकर अपनी नाकामी को बताते हुए यहाँ के जनप्रतिनिधियों से शराब की दुकान को खोलने की अपील कर रहा है जो बेहद शर्मनाक है। आने वाले समय में आबकारी विभाग यह भी मानने लगे कि अफीम, हेरोइन, ड्रग्स आदि मादक पदार्थों की भी खूब तस्करी हो रही है, सो तस्करी रोकने के लिए सरकारी लाइसेंस बाँट कर इनकी भी दुकानें खोल दी जाएँ। राजस्व भी खूब जुट जाएगा। गंगोलीहाट के व्यापार संघ ने इस बात को समझना चाहिए और शराब की दुकान खोले जाने के बजाय तस्करी रोके जाने को लेकर आंदोलित होना चाहिए।
अब तक जितने भी पत्र आबकारी विभाग ने विभिन्न जनप्रतिनिधियों को लिखे हैं, उनमें उसने साफगोई से अपनी प्रस्तावना का भी जिक्र किया है। लिखा है कि, आबकारी विभाग मानता है कि शराब एक सामाजिक बुराई है। विभाग का उद्देश्य धीरे-धीरे इसका प्रचलन कम कर ख़त्म करने का है। लेकिन यह समझना कठिन नहीं है कि सरकार प्रति वर्ष विगत वर्ष की तुलना में अधिक शराब बेचती है, और इससे आने वाला राजस्व भी प्रति वर्ष बढ़ता ही जाता है।
गंगोलीहाट में व्यापार संघ आबकारी विभाग के ही तर्कों पर शराब की दुकान खोले जाने की माँग कर रहा है। मुख्यतः शराब से पीड़ित महिलाओं और शराब की दुकान का निःस्वार्थ विरोध कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं व संगठनों को व्यापार संघ से इन खोखले तर्कों पर विचार कर गंगोलीहाट के विकास के तमाम मुद्दों के अतिरिक्त तस्करी के भी विरोध में एक बड़ा आंदोलन छेड़ने की उम्मींद है।
|
नहीं चाहिये हमें शराब, हमें चाहिये सही हिसाब ‘शराब विरोधी संघर्ष समिति बसौली’ द्वारा पूरे क्षेत्र में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की माँग के बावजूद जिला प्रशासन व आबकारी विभाग क्षेत्र में अवैध रूप से शराब बिकवा रहा है। इसका एक उदाहरण है होली से पूर्व आबकारी विभाग द्वारा मय शराब की पेटियों के पकड़े गये लोगों का मामला रफा-दफा कर देना। बसौली में यह आम चर्चा है कि आबकारी दल ने 24 फरवरी को हड़ौली गाँव के डुंगर सिंह भाकुनी, मेहरखोला (डोटियालगाँव) के चन्दन सिंह सुयाल, बसौली के केशर सिंह नेगी व डांगा (भकूना) गाँव के नन्दन सिंह डंगवाल को मय शराब की पेटियों के पकड़ा था। नन्दन सिंह डंगवाल को पुलिस चौकी में बुलाकर छोड़ दिया गया तो अन्य तीनों को बसौली से ऊपर के जंगल में। 7 मार्च को बसौली में आंदोलन की भावी रणनीति पर चर्चा करने ‘देवी थान’ में हुई बैठक में यह मामला जोर-शोर में उठा। इस आयोजन में सुनोली, हड़ौली, बसौली, भैंसोड़ी, डोटियालगाँव, ताकुला-सतराली, भकूना, झिझाड़, चुराड़ी आदि गाँवों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। शराब विरोधी संघर्ष समिति की अध्यक्ष लक्ष्मी देवी व ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष चंदन सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में आयोजित बैठक का संचालन करते हुए पंचायत संसाधन विकास के संयोजक ईश्वर जोशी ने कहा कि क्षेत्र की जनता ने लम्बे संघर्ष के बाद बसौली की दोनों शराब की दुकानें बन्द करवा दीं, लेकिन ग्रामीणों के कामकाज में व्यस्त हो जाने पर मौका ताड़ कर मोबाईल वैनों से शराब बेचने की अनुमति दे दी। तब से जिला प्रशासन द्वारा इलाके में अवैध शराब बिकवाकर समाज का अमन चैन बिगाड़ना जारी है। शराब लॉबी के पक्ष में भविष्य में यहाँ दमन की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। चुराड़ी के ग्राम प्रधान व ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष चन्दन सिंह बिष्ट, सामाजिक कार्यकर्त्ता भीम सिंह भाकुनी, लक्ष्मण सिंह भाकुनी व गंगा सिंह नेगी ने कहा कि अवैध शराब बिकवाकर शराब के पक्ष में माहौल तैयार करने वाले माफिया-पुलिस प्रशासनिक गठजोड़ को सबक सिखाने क्षेत्र की जनता कमर कस चुकी है। बाद में जनगीत गाते, शराब के खिलाफ दूसरे दिन बसौली क्षेत्र के विभिन्न गाँवों से बड़ी संख्या में आये महिला-पुरुषों ने अल्मोड़ा में प्रदर्शन कर डीएम कार्यालय के बाहर धरना दिया। इसमें विभिन्न राजनैतिक दलों, जन संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों के अतिरिक्त सामाजिक कार्यकर्त्ता भी शामिल थे। धरने के बाद मुख्य मंत्री को सम्बोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंप कर बसौली में शराब की दुकानें न खोलने, मोबाईल वैनों से शराब की बिक्री पर रोक लगाने व अवैध रूप से शराब बेचने वालों को दण्डित किये जाने की मांग की। आंदोलनकारी एसपी व आबकारी अधिकारी से भी मिले। जिला आबकारी अधिकारी ने होली से पूर्व अवैध शराब पकड़े जाने की बात स्वीकार तो की, लेकिन उनको सजा देने के सवाल बसौली क्षेत्र में शांतिपूर्ण ढंग से चलाए जा रहे शराब विरोधी आंदोलन के साथ ही अब लोग सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न विकास योजनाओं पर भी नजर रख रहे हैं। जनजागरूकता के इस वातावरण से सयाने लोग आशान्वित हैं कि इलाके में अमन-चैन और खुशहाली का वातावरण लौटेगा। |
























आपकी टिप्पणीयाँ