चमोली जिले के गैरसैंण व कर्णप्रयाग तहसील की तल्ला व मल्ला चाँदपुर पट्टियों में महिलाओं ने शराब विरोधी आन्दोलन प्रारम्भ किया है। वर्षों से शराब और उससे जनित आपदाओं-दुर्घटना, बीमारी, सामाजिक पारिवारिक कलह और आर्थिक दिवालियेपन को झेलतीं महिलाओं के लिए प्रसिद्ध धाम श्री आदिबदरी, विश्व प्रसिद्ध नन्दाराजजात की उद्गम स्थली नौटी और चण्डिका सिद्धपीठ सिमली में शराब की दुकान खेलों का निर्णय किसी बज्राघात से कम नहीं था। परिणामस्वरूप महिलायें सड़क पर उतर आयी। 17 मार्च को मैती आन्दोलन के प्रणेता कल्याण सिंह रावत के गाँव से प्रारम्भ हुए आन्दोलन में पहले ही दिन अवैध रूप से संचालित की जा रहीं 17 भट्टियाँ महिलाओं द्वारा नष्ट की गईं और उस शराब व उपकरणों को संयुक्त मजिस्ट्रेट कर्णप्रयाग को सौंप कर कार्यवाही की माँग की।
दोनों पट्टियों के 25 ग्रामों के महिला मंगल दल अध्यक्षों के नेतृत्व में चल रहे इस आन्दोलन के दूसरे चरण में 24 मार्च को महिलाओं ने बैनोली से नौटी तक 5 किमी. लम्बा जुलूस निकाला और सरकार की आबकारी नीति की आलोचना करते हुए मुख्य मंत्री भुवन चन्द्र खण्डूरी के नाम संयुक्त मजिस्ट्रेट के.के. निराला को ज्ञापन सौंपा।
डुंग्री, बैनोली, ऐरोली, मालई, दुबतोली, कफलोड़ी, सुक्री सैंग, धानई, सुनाएवाड़, मलेड़ी, देवल, तोली, सिमल्ट, कल्याणी, छातोली, नौटी, पुनगाँव, मंथर, कनोट पुडियाणी, झुडकन्डे नैणी, जसपुर, भटक्वाली, जखेट, रामधार ग्रामों की सैकड़ों महिलाओं ने सम्पूर्ण उत्तराखण्ड को शराब मुक्त कराने की माँग करते हुए मुख्यमंत्री को एक पत्र लिख कर कहा है कि यदि आप शराब को राजस्व का स्रोत ही मानते हैं तो अवैध शराब की दुकानों और उसकी वैध-अवैध बिक्री बन्द करने की एवज में हम ‘शराब कर’ देने के लिए तैयार हैं। अपने घरों का बजट बनाने में भी हिस्सा न लेने वाली पहाड़ी महिलाओं ने आर्थिक विशेषज्ञ की तरह सरकार से पूछा है कि क्या सरकारी फिजूलखर्ची और भ्रष्टाचार की कहानी बन चुकी फालतू योजनाओं को बन्द कर आप शराब से बिगड़ते पर्यावरण को नहीं बचा सकते ? 24 मार्च, 2008 को संयुक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन देते समय आन्दोलनकारियों ने कहा सरकार महिलाओं की माँग और उससे जुड़ी भावनाओं का सम्मान करे, अन्यथा तल्ला-मल्ला चांदपुर से उठी चिनगारी और आगे बढ़ेगी।
देवल की सर्वेश्वरीदेवी कहती हैं कि सीमा पर शहीद अथवा अपंग हुए लोगों से कई गुना अधिक लोग शराबजनित दुर्घटनाओं में मर चुके हैं या अपंग हुए हैं । इसीलिये आन्दोलनकारी पूरी समझ से कच्ची-पक्की शराब के खिलाफ आन्दोलित हैं। शराब तस्कर स्थानीय प्रशासन पर पूरा दबाव ही नहीं बनाते, उनके सम्पर्क अन्तर्राष्ट्रीय भी होते हैं। कभी-कभार पकड़ में आने वाली शराब से पोल खुलती है कि किस प्रकार तस्कर महंगी और नई कारों में शराब ढोते हैं।
चाँदपुर में चल रहे आन्दोलन को नन्दा देवी राजजात समिति, श्री आदिबदरी धाम मंदिर समिति सहित तमाम सामाजिक संगठनों का समर्थन प्राप्त है। अब देखना है कि शराब से जुड़ा माफिया पिछले कुचक्रों की तरह महिलाओं के नाम शराब के ठेके कर आन्दोलन को ठेंगा दिखाता है या आन्दोलन का दबाव सरकार को शराब की दुकानें समाप्त करने को विवश करता है। सन् 1984 की तरह यह आन्दोलन पूरे उत्तराखण्ड में फैला और यत्र-तत्र हो रहे शराब आन्दोलनों में एकता पैदा हो जाये तो प्रदेश में शराब का सफाया हो सकता है।

























आपकी टिप्पणीयाँ