प्रदेश का पहला राजकीय मेडीकल कॉलेज बनकर लगभग खड़ा है। प्रतीक्षा इस बात की है कि इसका शैक्षिक सत्र कब तक शुरू होगा। सूबे की भाजपा सरकार की प्राथमिकता इस मेडीकल कॉलेज को जल्दी शुरू करने की है।
मेडीकल कॉलेज के लिए आचार्य, उपाचार्य, प्रवक्ता प्राचार्य समेत सभी विभागीय कर्मचारियों की खोजबीन चल रही है। कई पद भरे जा चुके हैं। जल्दी ही मेडीकल काउन्सिल ऑफ इण्डिया का निरीक्षण होना है, अतः उसकी औपचारिकताएं पूर्ण की जा रही हैं। कॉलेज के लिए 23 फैकल्टी चाहिए, जिसमें 5 प्रोफेसर, 13 एसोसिएट प्रोफेसर, 5 असिस्टेंट प्रोफेसरों की आवश्यकता है। सर्वाधिक समस्या इस फैकल्टी को लेकर ही आ रही है। सूत्रों की मानें तो सरकार फैकल्टी की कमी को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश के राजकीय मेडीकल कॉलेजों में कार्यरत फैकल्टी का सहयोग लेने की कोशिश कर रही है।
श्रीनगर मेडीकल कॉलेज के लिए आने वाली फैकल्टी को आकर्षक वेतन एवं सरकारी आवास की पेशकश भी प्रदेश सरकार कर चुकी है। बताया जाता है कि अन्य मेडीकल कॉलेजों की अपेक्षा इस कॉलेज के लिए वेतन आदि की दुगनी पेशकश सरकार द्वारा की गयी, तब भी फैकल्टी का पूर्ण प्रबन्ध नहीं हो पा रहा है। लेकिन इस संकट से जूझ रही सरकार को आशा है कि जल्दी से जल्दी यह व्यवस्था कर ली जाऐगी। यदि समय रहते फैकल्टी की व्यवस्था नहीं हुई तो मेडीकल कॉलेज में मेडीकल कॉउन्सिल ऑफ इण्डिया का प्रस्तावित दौरा टल भी सकता है।