अल्मोड़ा के कुन्दन लाल साह प्रेक्षागृह में 12 से 14 नवम्बर तक सम्पन्न कुमाउँनी भाषा सम्मेलन में कई प्रस्ताव पारित किये गये और जनता से अपील की कि सभी कुमाउनी 2011 की जनगणना में ‘कुमाउनी’ को ‘मातृभाषा’ ‘हिन्दी’ को राष्ट्रभाषा लिखें। इससे कुमाउनी को मान्यता मिलेगी और कुमाउनी भाषियों की संख्या भी ज्ञात होगी।
‘कुमाउनी भाषा, साहित्य व संस्कृति प्रचार समिति कसारदेवी’ व कुमाउनी मासिक पत्रिका ‘पहरू’ द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में देश भर से आये कुमाउनी साहित्यकारों ने शिरकत की। पहले सत्र की अध्यक्षता जुगल किशोर पेटशाली ने की तथा मुख्य अतिथि थे जिला पंचायत अध्यक्ष मोहन राम। समिति के सचिव व ‘पहरू’ के सम्पादक डॉ. हयात सिंह रावत ने सभी लोगों का स्वागत करते हुए तीन दिन के कार्यक्रमों की रूपरेखा रखी। ‘दुदबोलि’ के सम्पादक मथुरादत्त मठपाल ने अपने आधार व्याख्यान में कुमाउनी भाषा पर लिखे गये साहित्य की जानकारी देते हुए बताया कि कुमाउनी एक भाषा के रूप में संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किये जाने के लिये समर्थ है। डॉ. बी.डी.नेगी व डॉ. चन्द्र सिंह चौहान आदि वक्ताओं ने माना कि आपसी बातचीत में अधिक से अधिक कुमाउनी का प्रयोग किया जाना चाहिये। जै नन्दा लोक कला केन्द्र, अल्मोड़ा द्वारा चन्दन बोरा के निर्देशन में स्वागत गीत व देवभूमि मां शारदे लोक कला समिति द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
दूसरे सत्र में कुमाउनी कविता ‘दशा व दिशा’ विषय पर चर्चा में सत्र के अध्यक्ष त्रिभुवन गिरी, सत्र संचालक नीरज पंत, डॉ. कपिलेश भोज, डॉ. दीपा गोबाड़ी, प्रताप सिंह स्यूनरी, पूरन चन्द्र कांडपाल (दिल्ली), दामोदर जोशी (हल्द्वानी), गिरीश चन्द्र महरोत्रा आदि ने भाग लिया। महसूस किया गया कि कुमाउनी में खंडकाव्य व महाकाव्य लिखा जाय। तीसरे सत्र में ‘लोक साहित्य व लोक संगीत’ पर चर्चा की गई। सत्राध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट (देहरादून), सत्र संचालक कैलाश डोलिया, भुवन चन्द्र तिवारी, लीला खोलिया, महेन्द्र ठकुराठी, नन्दा बल्लभ पांडे आदि सभी का मानना था कि बिखरे पड़े तमाम कुमाउनी लोक साहित्य को समेटा जाये।
दूसरे दिन प्रो. शेर सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में कुमाउनी गद्य साहित्य पर चर्चा की गई। चर्चा में दामोदर जोशी, महेन्द्र ठकुराठी, डॉ. जय दत्त उप्रेती, शेर सिंह बुढ़ाल, मथुरादत्त मठपाल, जमन सिंह बिष्ट, पूरन चन्द्र काण्डपाल, डॉ. रेखा भट्ट आदि ने भाग लिया। कुमाउनी में अधिक से अधिक उपन्यास, नाटक, आत्मकथा, जीवनी आदि लिखने की जरूरत महसूस की गई। संचालन मोहन चन्द्र जोशी (गरुड़) ने किया। मुख्य अतिथि संसदीय कार्य मंत्री प्रकाश पंत ने दिल्ली से आये पूरन चन्द्र काण्डपाल के कुमाउनी कहानी संग्रह- ‘भल करौ च्याला त्वील’ का विमोचन किया। अगले सत्र में अल्मोड़ा बार एसोसियेशन के अध्यक्ष शेखर लखचौरा की अध्यक्षता में ‘कुमाउनी भाषा के विकास में राजनीतिक दलों की भूमिका’ विषय पर चर्चा की गई। चर्चा में गोविन्द सिंह भंडारी, तरुण जोशी, किशोरी लाल वर्मा, रमेश बहुगुणा, महेन्द्र मटियानी, शिरीष पाण्डे, डॉ. दीपा गोबाड़ी, मुख्य अतिथि बी.आर. धोनी व सत्र संचालक प्रकाश जोशी ‘शूल’ ने भाग लिया। राजनैतिक दलों की उदासीनता पर चिन्ता जताते हुए कुमाउनी भाषा को मान्यता दिलाने के प्रयास और तेज करने की जरूरत महसूस की।
तीसरे सत्र में मोहन चन्द्र कण्डवाल की अध्यक्षता में ‘कुमाउनी बाल साहित्य’ पर चर्चा की गई। मुख्य अतिथि सांसद प्रदीप टम्टा ने ‘अरुण कुमार भट्ट स्मृति कुमाउनी निबंध प्रतियोगिता’ में तीसरे स्थान पर रही डॉ. दीपा गोबाड़ी को पुरस्कृत किया। चौथे सत्र में सम्पन्न कुमाउनी कवि सम्मेलन में दूर-दूराज से आये कवियों ने अपनी रचनाओं से समाँ बाँधा। सत्र की अध्यक्षता गोपाल दत्त भट्ट ने तथा संचालन मोहन ‘कुमाउंनी’ ने किया।
अंतिम दिन डॉ. जगदीश सिंह बिष्ट की अध्यक्षता में 10 बुजुर्ग कुमाउनी साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। ये थे – मोहन चन्द्र भट्ट (90 वर्ष), भवाली; तारा राम (85 वर्ष), ग्राम सुरंग ओखकांडा; भीमताल के 81 वर्षीय नेत्र सिंह रौतेला, हल्द्वानी के 79 वर्षीय ललित मोहन पाण्डे, दीवान सिंह भाकुनी (77 वर्ष), लखनऊ से आये ललित मोहन पन्त (77 वर्ष), भोपाल से गोविन्द सिंह असिवाल (74 वर्ष), पिथौरागढ़ के 67 वर्षीय महेन्द्र मटियानी, 63 वर्षीय जुगल किशोर पेटशाली व मथुरादत्त अण्डोला ( 58 वर्ष)। इन्हें शॉल ओढ़ा कर सम्मान पत्र व प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस सत्र में ‘बचूली देवी रावत स्मृति बाल कहानी प्रतियोगिता’ में दूसरा व तीसरा स्थान प्राप्त ज्योतिर्मयी पंत व सोनू उप्रेती को मुख्य अतिथि दयानन्द आर्य द्वारा पुरस्कृत किया गया। सम्मेलन में कुमाउनी साहित्य की प्रदर्शनी भी लगाई गयी। सम्मेलन की एक विशेषता रही कि हर काम कुमाउनी में करने के साथ ही मडुवा की रोटी, भट्ट की चुड़काणी, मादिरा की खीर, भङिर की चटनी आदि व्यंजन परोसे गये।
सम्मेलन में पारित प्रस्तावों में कुमाउनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने; ‘कुमाउनी भाषा अकादमी’ गठित करने; कुमाउनी के आदि कवि गुमानी पंत की याद में एक लाख रुपये का सालाना पुरस्कार देने; उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से आज तक के सालाना दस पुरस्कारों की एकमुश्त घोषणा करने तथा उत्तराखंड के स्कूली पाठ्यक्रम में कुमाउनी को एक विषय के रूप में शामिल करने की माँग की गई। उत्तराखंड के पेयजल व संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने इन माँगों पर उत्तराखंड सरकार से अतिशीघ्र निर्णय करवाने का भरोसा दिलाया। उन्होंने ‘अरुण कुमार भट्ट स्मृति कुमाउनी निबंध प्रतियोगिता’ में प्रथम आये प्रो. शेर सिंह बिष्ट को पुरस्कृत किया। सांसद प्रदीप टम्टा ने कुमाउनी को आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने के लिये भरसक प्रयास करने का भरोसा दिलाया।