नैनीताल समाचार (15 से 30 नवम्बर) के अंक में कपिलेश भोज का आलेख ‘केवल कुमाउँनी कवि के रूप में देखना गिरदा को छोटा करना है’ मैं छोटा शब्द का प्रयोग हम लोक भाषा (गढ़वाली-कुमाउँनी) में काम करने वालों को ‘गाली’ जैसा लगा। श्री भोज से मैं पूछना चाहता हूँ कि क्या केवल अपनी मातृभाषा कुमाउँनी में कविता लिखना छोटापन है। गिर्दा से मेरा जुड़ाव हिन्दी के कारण नहीं, बल्कि कुमाउँनी के कारण हुआ और वे मंचों पर हमेशा गौर्दा और गुमानी को अपने पूर्वजों में गिनते हुए उन्हीं की विरासत को आगे बढ़ाने की बात करते थे।
अगर अपनी मातृभाषा गढ़वाली-कुमाउँनी में लिखकर हम छोटे हो गये तो फिर श्री भोज की छोटे लोगों की सूची में तो तुलसी (अवधी), सूरदास/रसखान (ब्रजभाषा), नजरुल इस्लाम, रवीन्द्रनाथ टैगोर (बंगला), बुल्लेशाह (पंजाबी) और वे तमाम साहित्यकार भी होने चाहिये, जिन्होंने जीवनपर्यन्त अपनी मातृभाषा, पंजाबी, मराठी, गुजराती, असमी, डोगरी, कश्मीरी, तमिल, तेलगू, कन्नड़, मलयालम आदि क्षेत्रीय भाषाओं में लिखा और ऐसा लिखा कि हिन्दी के बड़े-बड़े साहित्यकार भी उनका लोहा मानते हैं। मेरा श्री भोज से आपके समाचार पत्र के माध्यम से अनुरोध है कि वे लोकभाषा/क्षेत्रीय भाषा के लेखकों को छोटा कह कर कुमाउँनी के आदि कवि गुमानी, कृष्णा पाण्डे, गौरीदत्त पाण्डे, चिन्तामणि जोशी, तारादत्त पाण्डे, चारु चन्द्र पाण्डे आदि को अपमानित न करें। गिर्दा की आत्मा को पीड़ा पहुँचेगी।
नरेन्द्र सिंह नेगी , पौड़ी
{वस्तुतः कपिलेश भोज ने अपनी टिप्पणी में कोई शीर्षक नहीं दिया था। शीर्षक हमने दिया है, जो किंचित भ्रामक हो सकता है। श्री भोज ने जो कहना चाहा है वह यह है कि काव्य रचना और वह भी कुमाउनी में काव्य रचना गिरदा के व्यक्तित्व का महज एक आयाम है। उनके व्यक्तित्व के अनेक आयाम थे, जिन्हें ध्यान में रखा जाना चाहिये। -सम्पादक}
‘नैनीताल समाचार’ के हीरक अंक निकलने व 33 वर्ष का होने पर बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। ‘नैनीताल समाचार’ अन्य अखबारों जैसा नहीं है, जिसे पढ़ कर रख दिया जाता है। ‘हरेले’ में जब ‘हरेले का तिनड़ा’ संलग्न होकर आता है तो इसमें आत्मीयता जुड़ जाती है।
ज्योतिर्मई पन्त , गुड़गाँव, हरियाणा
15 से 30 नवम्बर के अंक में प्रकाशित ‘छायाचित्रों और फिल्मों से सजा रहा नैनीताल’ में उत्तराखंड हाईकोर्ट के दसवें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह की बेबाक समीक्षा नैनीताल समाचार का ही बूता है। साधुवाद।
एच.सी.पाण्डे, एडवोकेट, नैनीताल