विकास नगर से यमनोत्री तक यानी यमुना घाटी में जो कहर पिछले सप्ताह की बरसात ने बरपा किया, वह यमुना घाटी की जनता कभी नहीं भूल सकती। विद्युत, पेयजल, रास्ते, दूरभाष आदि सभी मूलभूत सेवायें मूसलाधार बरसात के चलते भूस्खलन और भूधँसाव के कारण बाधित हो चुके थे, लोग सिर्फ व सिर्फ ईश्वर से जिन्दा रहने की दुआ माँग रहे थे।
ज्ञात हो कि चकराता विकास खण्ड के अन्तर्गत खमरौली के 47 एवं डाबरा के 22 परिवारों के आवासीय भवन भूस्खलन से समाप्त हो गये तो गाँव के दो लोगों की मौत भी हुई। सरना गाँव की कुल 23 परिवारों की 50 नाली सिंचित भूमि भूधँसाव के चलते समाप्त हो गयी। गाँव के अत्तर दत्त जोशी ने बताया कि गाँव के नीचे से भूस्खलन जारी है और ग्रामीणों को खतरा बना हुआ है। नैनबाग स्थित सिलासू पुल के पास गधेरा पूरी सड़क को ही बहा कर ले गया। टिहरी के नैनगाँव के ग्रामीणों की लगभग 50 नाली सिंचित कृषि भूमि एवं 500 पेड़ों वाला आम का बाग बादल फटने से तबाह हुआ है। यहीं से थोड़ा आगे भुटगाँव गधेरे का उफान इतना खतरनाक था कि दिल्ली-यमुनोत्री मोटर मार्ग पर सौ मीटर गहरी खाई बना कर ले गया। यहाँ पर गाड़ी पास करना खतरे से खाली नहीं है। इसी तरह डामटा स्थित दियाड़ी खड्ड ने दो सौ मीटर सड़क को मलबे मे तब्दील कर दिया। उत्तरकाशी के सारीगाड़ स्थित बचन दास के परिवार सहित एक दर्जन परिवारों की लगभग 150 नाली सिंचित भूमि रौखड़ में तब्दील हो गयी। अब इन परिवारों के पास आजीविका चलाने का कोई साधन नहीं बचा है। बर्नीगाड़ से सारीगाड़ तक 10 किमी. सड़क यमुना नदी में समा गयी। उत्तरकाशी के कफनौल गाँव के 25, सिमलसारी के 10, हिमरोल के 5 परिवारों के आवासीय भवन भारी भूस्खलन के कारण ढह गये है।
विकासनगर से लेकर यमनोत्री तक का सफर इस वर्ष की बरसात ने दुश्वार कर दिया है। दिल्ली-यमनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग का 162 किमी. हिस्सा भूस्खलन से बहुत ज्यादा क्षतिग्रस्त हुआ है। नौगाँव से पुरोला की तरफ जाने वाला हिमांचल को जोड़ने वाला मोटर मार्ग अब तक नहीं खुल पाया है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि आपदा से जो क्षति हुई है, उसकी सूचना सरकार तक ठीक-ठीक नहीं पहुँच रही है। राजस्व पुलिस आपदा की रिपोर्ट शासन तक पहँुचाने बाबत प्रत्येक परिवार से रु. 5,000 की माँग कर रहे हैं।
उनकी माँग है कि इस नुकसान का सर्वेक्षण मजिस्ट्रेट स्तर पर होना चाहिए, क्योंकि राजस्व पुलिस (पटवारी) ग्रामीणों का विश्वास खो चुकी है। उधर मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने यमुना घाटी में हुई आपदा का आँकलन हवाई सर्वेक्षण करके किया है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को सख्त हिदायत दी कि वे आपदा से हुई क्षति का मुआयाना करके सरकार को अविलम्ब रिर्पोट सौंपे, ताकि लोगो को उचित मुआवजा मिल सके।