सीताराम बहुगुणा
विजय बहुगुणा के प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रदेश में जल विद्युत परियोजना समर्थकों के हौसले बुलन्द हैं। इन परियोजनाओं के हानिकारक पर्यावरणीय प्रभावों की बात कर रहा हर व्यक्ति परियोजना समर्थकों के निशाने पर है। डॉ. भरत झुनझुनवाला पर किये गये हमले से यही साबित होता है कि बहुगुणा राज में ईमानदारी से अपनी राय जाहिर करने वाले कितने बड़े खतरे में हैं।
श्रीनगर में अलकनन्दा नदी पर जीवीके कंपनी 330 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना बना रही है। कंपनी पर आरोप है कि उसने डैम की स्वीकृत 60 मीटर ऊँचाई को धोखे से बढ़ा कर 90 मीटर कर दिया है। ऊँचाई बढ़ाने के पीछे यह मंशा है कि बरसात में डैम में ज्यादा पानी भरने से ज्यादा बिजली बनेगी और ज्यादा मुनाफा होगा। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की बिजली बेचने का अधिकार 30 वर्ष तक जीवीके कंपनी के पास रहेगा। परियोजना का विरोध कर रहे लोग डैम की ऊँचाई बढ़ाने को पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी बता रहे हैं। इससे स्थानीय जनता की आस्था का प्रतीक धारीदेवी मंदिर भी डूब क्षेत्र में आ गया है। प्रसिद्ध स्तंभकार डॉ. भरत झुनझुनवाला कम्पनी द्वारा की गई इस अनियमितता को लेकर कोर्ट गये। कोर्ट ने भी उनकी बात को सही पाते हुए अग्रिम आदेशों तक डैम का काम रुकवा दिया। ये बात और है कि सरकार की शह पर कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करते हुए जीवीके कंपनी गुपचुप तरीके से डैम का काम आगे बढ़ाती रही है। पिछले दिनों भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की एक टीम के श्रीनगर आकर डैम का निरीक्षण करने से इस बात की संभावना बढ़ने लगी है कि श्रीनगर परियोजना हमेशा के लिए बंद की जा सकती है। इसे देखते हुए जीवीके कंपनी मोटी रकम खर्च कर स्थानीय नेताओं एवं ठेकेदारों को साथ लेकर लगातार सरकार पर दबाव बना रही है कि डैम का काम बंद न हो।
22 जून को स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्द, जल पुरुष राजेन्द्र सिंह एवं वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक श्रीनगर परियोजना का विरोध करने के लिए धारी देवी पहुँचे। जीवीके कंपनी की शह पर 40-50 स्थानीय ठेकेदारों ने इनका भारी विरोध करना शुरू कर दिया। पुलिस ने किसी तरह इन लोगों का यहाँ से बाहर निकाला एवं हरिद्वार के लिए रवाना कर दिया। लेकिन परियोजना समर्थक ठेकेदार इन लोगों का पीछा करते रहे एवं श्रीनगर के पास लछमोली में रह रहे डॉ. भरत झुनझुनवाला के घर पहुँचे एवं तोड़फोड़ की, उनके साथ मारपीट कर उनके चेहरे पर कालिख लगा दी। प्रशासन का रवैया इस मामले मे हैरान करने वाला रहा। पिछले दिनों ज्ञान स्वरूप सानन्द के डॉ. भरत झुनझुनवाला के घर में रुकने के दौरान भी परियोजना समर्थकों ने उनके घर पर विरोध प्रदर्शन कर उन्हें लछमोली से खदेड़ने की बात की थी। बावजूद इसके उनके घर पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किये गये। उल्टे अधिकारी उन्हें इन सब मामलों में न पड़ने एवं पढ़ने लिखने तक सीमित रहने की सलाह देते रहे।